दुनिया बाज़ार है !

दुनिया बाज़ार है !

  • सुधीर कुमार यादव 

दुनिया बाज़ार है। इसे आँखों से भरकर देखिये। बेफिकर जी भरकर इसे सूंघते जाइए। कोई नहीं पूछने वाला। बस रुकना मना है। 100 मीटर जाकर लौट आए तो दुकानदार अपने ग्राहक को भूल जाता है, आप तो फिर भी राहगीर हैं।भीड़ बहुत है, इसमे छिपकर अपनी चाहतें पूरी कर लीजिये। लेकिन ईमान को मत मिटाईएगा।

जलेबी, समोसे, संतरे, किराने की दुकान सब महक रहे हैं। इनका मुफ्त में लुत्फ उठाइए, पर इन्हे घूरिए मत, अगली दुकान की ओर भागिए, जैसे वो आपका ही इंतजार कर रही हो। वहा भी रुकिए मत….

गरीबी भी ये महसूस करवा सकती है, उसे गाली मत दीजिये। अमीरों की अपनी मजबूरियाँ हैं। उनके लिए दुनिया बंधी है। हर आँख उनपर रहती है। वो दुनिया को सूंघ नही सकते, इसे देख नहीं सकते, बस घूर सकते हैं अपनी शीशा चढ़ी कारों में से। एयर प्युरिफ़ायर महक को मार देता है। मैं राहगीर हूँ, ये दुनिया मेरी है।

आइए आप भी, मुझे किसी के साथ ये सब बांटना है।मैं आपकी गरीबी की दुआ नही कर रहा बस आप अपनी अमीरी को भुलाईए थोड़ी देर। मेरे बिना आप भी अकेले हैं, ये बात आपको दिखेगी बशर्ते अपनी कार का शीशा गिरा दीजिये

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